इतने हजार से ज्यादा सरकारी कर्मचारी हो गए बीमार, प्रशासन की मुश्किल बढ़ी…..

पूर्वांचल पोस्ट न्यूज नेटवर्क

मेरठ। मेरठ में बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों को कोरोना संक्रमण ने घेर लिया है। पंचायत चुनाव के मतदान के लिए पोलिंग पार्टियों में जिन कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई थी उनमें से दो हजार से ज्यादा कर्मचारी ड्यूटी पर नहीं पहुंचे। ड्यूटी पर न आने का कारण गंभीर बीमारी और कोरोना संक्रमण का शिकार होना बताया गया। इन हालात के चलते जिला प्रशासन को पोलिंग पार्टियों की संख्या पूरी करना मुश्किल हो गया। आखिरकार आसपास के तीन जनपदों से भी 200 से ज्यादा कार्मिक मतदान की पूर्व रात्रि में इमरजेंसी में बुलाकर पोङ्क्षलग पार्टियों की संख्या को पूरा किया जा सका।

11,600 में से 9 हजार भी नहीं आए

पंचायत चुनाव के लिए जनपद में 2346 बूथ बनाए गए थे। इनके लिए रिजर्व को शामिल करते हुए कुल लगभघ 2900 पोङ्क्षलग पार्टियों के लिए 11,600 कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई थी लेकिन ड्यूटी का आदेश प्राप्त होते ही बड़ी संख्या में कर्मचारी इसे कटवाने के प्रयासों में जुट गए थे। खुद को विभिन्न गंभीर बीमारियों से ग्रसित बताने वाले कर्मचारियों का मेडिकल बोर्ड ने परीक्षण किया। बोर्ड ने लगभग 400 कर्मचारियों की बात को सही पाया और उनकी ड्यूटी काटने की संस्तुति की। लेकिन मतदान से पहले दिन तक बड़ी संख्या में कर्मचारी खुद को कोविड पीजिटिव बताते हुए ड्यूटी पर न भेजने की मांग कर रहे थे। कोरोना संक्रमण के फैलाव की गति ने अफसरों को आशंकित कर रखा था। 25 अप्रैल को वही हुआ जिसका डर था। 11,600 में से 9000 भी कार्मिक नहीं पहुंचे। इन हालात में 2346 पोलिंग पार्टियों के लिए 9,384 प्रत्येक पार्टी में चार कर्मचारी जुटाना मुश्किल हो गया। शाम तक संख्या पूरी न होने पर विशेष रिजर्व के 350 कर्मचारी पोङ्क्षलग पार्टियों को भेजने में जुटे कर्मचारी तथा मास्टर ट्रेनरों को भी पोलिंग पार्टी में शामिल कर दिया गया। इसके बाद भी संख्या पूहीं हो सकी। लिहाजा रात में ही मुजफ्फरनगर, बागत औ गाजियाबाद जनपदों से मदद मांगी गई। लगभग 200 कर्मचारी इन जनपदों से रात में ही बुलाए गए।

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