25 साल का इंतजार खत्म: चकिया विधानसभा को मिला पहला राजकीय बीएससी कॉलेज……..विधायक नोएडा पंकज सिंह व विधायक कैलाश आचार्य ने रखी नींव
9.60 करोड़ रुपये से बनेगा विज्ञान संकाय भवन
विधायक कैलाश आचार्य की लगातार पैरवी लाई रंग
पांच विज्ञान विषयों में बीएससी की मिली मंजूरी
चकिया (चंदौली)। चकिया विधानसभा क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए सोमवार का दिन ऐतिहासिक बन गया। करीब 25 वर्षों से लंबित विज्ञान संकाय की मांग आखिरकार पूरी हो गई। सावित्रीबाई फुले राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में 9 करोड़ 60 लाख रुपये की लागत से बनने वाले विज्ञान संकाय भवन का भूमि पूजन मुख्य अतिथि नोएडा विधायक एवं भाजपा के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष पंकज सिंह तथा क्षेत्रीय विधायक कैलाश आचार्य ने संयुक्त रूप से किया। इसके साथ ही चकिया विधानसभा क्षेत्र को अपना पहला राजकीय बीएससी कॉलेज मिलने का रास्ता साफ हो गया।

विज्ञान संकाय की स्थापना के लिए विधायक कैलाश आचार्य ने विधानसभा में चार बार मुद्दा उठाया। इसके अलावा मुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा विभाग के समक्ष लगातार पैरवी की। उनके प्रयासों के बाद शासन ने विज्ञान संकाय भवन निर्माण के लिए 9.60 करोड़ रुपये की मंजूरी दी, जिसमें प्रथम किस्त के रूप में एक करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। भवन का निर्माण आवास विकास परिषद, वाराणसी द्वारा कराया जाएगा।
पांच विषयों में होगी बीएससी की पढ़ाई
नए विज्ञान संकाय में भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, प्राणी विज्ञान तथा गणित विषयों में बीएससी की पढ़ाई होगी। धानापुर के बाद यह जनपद का दूसरा राजकीय महाविद्यालय होगा, जहां विज्ञान वर्ग की पढ़ाई शुरू होगी, जबकि चकिया विधानसभा क्षेत्र का यह पहला राजकीय बीएससी कॉलेज बनेगा।

शिक्षा सबसे बड़ी ताकत : पंकज सिंह
मुख्य अतिथि पंकज सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश शिक्षा, उद्योग और आधारभूत विकास के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षा को जीवन की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ही उन्हें नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी और प्रदेश के विकास में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
अब बाहर नहीं जाना पड़ेगा : कैलाश आचार्य
विधायक कैलाश आचार्य ने कहा कि विज्ञान संकाय शुरू होने से क्षेत्र के विद्यार्थियों को बीएससी की पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को स्थानीय स्तर पर ही गुणवत्तापूर्ण विज्ञान शिक्षा मिलेगी, जिससे क्षेत्र के शैक्षणिक विकास को नई गति मिलेगी।




