मैं मरा नहीं, ज़िंदा हूँ! गले में तख्ती लटका कर पहुंचा बुज़ुर्ग, अफसर भी रह गए दंग
पूर्वांचल पोस्ट न्यूज नेटवर्क, वाराणसी/लखनऊ।
“मैं ज़िंदा हूँ!” — शनिवार को राजातालाब तहसील में आयोजित समाधान दिवस के दौरान यह दृश्य देखकर हर कोई चौंक गया, जब कचनार गांव के बुज़ुर्ग सभूति मिश्रा अपने गले में यही संदेश लिखी तख्ती लटकाए पहुंचे। सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित किए गए मिश्रा जी अब खुद को ज़िंदा साबित करने की जद्दोजहद में हैं।
अपर नगर मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में मिश्रा जी ने अपनी फरियाद रखी और मांग की कि उन्हें जीवित मानते हुए सरकारी दस्तावेजों में उनका नाम पुनः दर्ज किया जाए। अफसरों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच का आश्वासन दिया।
समाधान दिवस में उठे कई गंभीर मामले
समाधान दिवस में कुल 241 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें से 16 का मौके पर निस्तारण किया गया। वहीं, पिंडरा तहसील सभागार में भी सीडीओ हिमांशु नागपाल द्वारा 63 मामलों की सुनवाई की गई, जिनमें 7 का निस्तारण हो सका।
कई ग्रामीणों ने अपनी-अपनी पीड़ाएं रखीं:
अतुल मिश्रा ने ग्राम प्रधान पर भूमि पर अवैध कब्जे का आरोप लगाते हुए कहा कि जिस ज़मीन पर प्राथमिक विद्यालय का नाम दर्ज है, उस पर प्रधान ने कब्जा कर लिया है। उन्होंने सीमांकन की मांग की।
माधुरी जायसवाल (गांव- बिहड़ा) ने मारपीट की शिकायत की, वहीं बंदेपुर के रामजी ने आरोप लगाया कि गांव के ही एक व्यक्ति ने उनकी खेत की मेड़ काटकर उसमें पत्थर गाड़ दिए हैं।
जगतपुर के मनोज सिंह ने बताया कि वे सात बार आवेदन देकर चकरोड को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग कर चुके हैं, पर कोई सुनवाई नहीं हो रही।
इस समाधान दिवस ने एक बार फिर दिखा दिया कि ज़मीनी स्तर पर आम जनता किन-किन परेशानियों से जूझ रही है — कहीं ज़िंदा व्यक्ति मृत घोषित कर दिया जाता है, तो कहीं सरकारी ज़मीन पर कब्जे के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे।