इस बार कोरोना कर रहा सीधे वार, युवाओं तक को पड़ रही आक्सीजन की जरूरत….

पूर्वांचल पोस्ट न्यूज नेटवर्क

लखनऊ। इस बार कोरोना वायरस की संक्रामक क्षमता इतनी ज्यादा है कि पहले ही दिन वह सीधे फेफड़ों पर वार कर रहा है। इससे मरीजों की गंभीरता दर व मौतों का आंकड़ा भी बढ़ रहा है। स्थिति यह है कि 25 से 30 वर्ष तक के युवाओं को भी आक्सीजन सपोर्ट व वेंटिलेटर पर रखना पड़ रहा है। यह निष्कर्ष किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय केजीएमयू व अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के डाक्टरों ने मरीजों पर की गई केस स्टडी के आधार पर निकाला है। बहुत से मरीज तो ऐसे हैं जिनके फेफड़ों में कोरोना का गंभीर संक्रमण होने के बावजूद उनकी रिपोर्ट आरटीपीसीआर जांच में निगेटिव आ रही है। जबकि कोरोना पॉजिटिव व निगेटिव मरीजों मरीजों का सीटी स्कैन थोरैक्स देखने पर दोनों में एक जैसे लक्षण पाए जा रहे हैं। इसलिए सभी को अधिक सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है।

पहले ही दिन फेफड़ों में संक्रमण केजीएमयू में रेस्पिरेट्री मेडिसिन के विभागाध्यक्ष व आइएमए.एएमएस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डाण् सूर्यकांत त्रिपाठी कहते हैं कि वर्ष 2020 और 21 में फर्क यह है कि पहले कोरोना वायरस का संक्रमण होने पर वह दो दिनों तक नाक में रहता था। फिर वहां से गले में उतरकर दो दिन रुकता था। इसके बाद पांचवें दिन फेफड़ों तक पहुंचता था। वह भी एक फेफड़े के किसी हिस्से को डैमेज करता था। मगर अब पहले दिन ही वह सीधे फेफड़ों में पहुंच रहा है। जोकि दोनों फेफड़ों के कई हिस्से को क्षतिग्रस्त कर कोविड निमोनिया पैदा कर रहा है। यही वजह है कि मरीजों के गंभीर होने की संख्या व मौतों में बढ़ोतरी हो रही है। हमारे यहां रेस्पिरेट्री आइसीयू में यूपी के विभिन्न जिलों से सांस की समस्या को लेकर कई मरीज ऐसे आए जिनका आरटीपीसीआर निगेटिव था। मगर सीटी स्कैन में सीटी स्कोर 15 से भी ऊपर था। बिल्कुल जैसे कोरोना मरीजों में होता है। आक्सीजन स्तर ऐसे मरीजों का 70 व उससे भी कम हो गया था। कोविड उपचार करने पर वह ठीक हुए।

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