जानिए कब तक होगा होलिका दहन का मूहुर्त, कैसे करें पूजा….

पूर्वांचल पोस्ट न्यूज नेटवर्क

लखनऊ। बुराई की प्रतीक होलिका का दहन रविवार को होगा, जबकि रंग सोमवार को खेला जाएगा। होलिका दहन रविवार शाम 6ः21 बजे से रात्रि 8ः41 बजे तक करना उत्तम होगा। आचार्य आनंद दुबे ने बताया कि भद्रा रहित प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा तिथि, होलिका दहन के लिए उत्तम है। इस बार भद्रा दिन में ही समाप्त हो जाएगी।

आचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि पूर्णिमा रविवार सुबह 3ः27 बजे से शुरू होकर रात 12ः17 बजे तक रहेगी। भद्रा दोपहर 1ः54 तक रहेगी। होलिका दहन से पहले होलिका की परिक्रमा कर समृद्धि की कामना की जाती है। गुलाल, अबीर, फूल, नारियल, मिष्ठान, कच्चा सूत से होलिका का पूजन किया जाता है। होलिका पूजन के उपरांत होलिका दहन होता है। नए अनाज की बालियां और गोबर से बने बल्ले चढ़ाए जाते हैं। होलिका दहन के बाद उसमें भूना गन्ना खाया जाता है। दहन की लकड़ी के टुकड़े को कुछ लोग घर पर भी ले जाते हैं।

होलिका दहन कर राख से करते हैं तिलक होलिका दहन के बाद राख का तिलक करना और शरीर पर लगाना भी शुभ माना जाता है। होलिका की ऐसी मान्यता है कि वर्षभर स्वस्थ रहने हेतु शरीर पर पीली सरसों को पीसकर सरसों के तेल से उबटन लगाकर उस उबटन को उतारकर गाय के गोबर के साथ होलिका में दहन करने से स्वास्थ्य लाभ होता है।

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