कात‍िल शबनम के चाचा और चाची बोले.फांसी से म‍िलेगा इंसाफ, सात कब्रें द‍िलाती हैं नरसंहार की याद…..

पूर्वांचल पोस्ट न्यूज नेटवर्क

मुरादाबाद। अमरोहा के बावनखेड़ी नरसंहार के करीब 13 वर्ष हो चुके हैं। फांसी के तख्‍ते के बेहद करीब पहुंची शबनम के चाचा सत्तार अली एवं चाची फातिमा ने कहा कि दोषियों को फांसी होने से ही मृतकोंं को इंसाफ मिलेगा। वह भाई शौकत अली के मकान में नरसंहार के बाद से ही रह रहे हैं। हर साल मकान के एक तरफ बनी सातों की कब्रों की सफाई करते हैं।

उनका कहना है कि शबनम और सलीम ने जो कृत्य किया है उससे वह फांसी के ही हकदार हैं। मुकदमे के वादी डॉ अब्दुल लतीफ का कहना है कि देश के कानून पर पूरा भरोसा है। कानून ने जो फैसला सुनाया है, उससे सहमत हैं। उधर सलीम की मां चमन जहां का कहना है कि वह रात.दिन अल्लाह से दुआ करती हैं। अल्लाह जो करेगा बेहतर करेगा। मीडिया कर्मियों को देखकर उन्होंने इस मामले में कुछ भी बताने से साफ इन्‍कार कर दिया और कमरे के अंदर चली गई। सलीम के बुजुर्ग पिता अब्दुल रऊफ गांव में पकौडी का ठेला लगाकर जीवन यापन कर रहे हैं। बुधवार को वह एक रिश्तेदार बीमार महिला को देखने मुरादाबाद गए हुए हैं। उधर शबनम.सलीम की फांसी को लेकर गांव के लोगों की अलग.अलग प्रतिक्रियाएं हैं। कुछ लोग फांसी की सजा को उचित ठहराते हैं। तो कुछ उनके बचाव में भी हैं।

यह था पूरा मामला

गांव बावनखेड़ी निवासी शिक्षक शौकत अली की इकलौती शिक्षामित्र बेटी शबनम का घर के सामने आरा मशीन पर मजदूरी करने वाले सलीम से प्रेम प्रसंग हो गया था। 14 अप्रैल 2008 की रात को दोनों ने मिलकर पिता शौकत अली मां हाशमी इंजीनियर भाई अनीश भाभी अंजुम बीटेक के छात्र भाई राशिद फुफेरी बहन राबिया के कुल्हाड़ी से गला रेतकर तथा 11 माह के भतीजे अर्श की गला घोटकर हत्या कर दी थी। 19 अप्रैल को हसनपुर कोतवाली पुलिस ने सलीम को गिरफ्तार कर तालाब से हत्या में प्रयुक्त कुल्हाड़ी तथा खून से सने कपड़े बरामद किए थे। बाद में शबनम को भी गिरफ्तार कर दोनों को जेल भेज दिया था। बिन ब्याही शबनम ने 13 दिसंबर 2008 को मुरादाबाद जेल में बेटे को जन्म दिया जिसका नाम शबनम ने खुद ताज रखा था। 30 जुलाई 15 को बाल कल्याण समिति अमरोहा ने 6 साल 7 माह 21 दिन जेल में काट चुके ताज को हसनपुर तहसील के गांव दौरारा निवासी उस्मान सैफी को सौंपा था।

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