जब आरपीएफ ने तीन बाल मजदूरों को बचाया, टीम ने धरदबोचा तस्कर को…….पीछे के जनरल कोच में तीनों मिले सहमें हुए
मुगलसराय, चंदौली।
आरपीएफ डीडीयू पोस्ट ने रविवार को एक बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन नाबालिग बच्चों को बाल मजदूरी से बचाया और एक तस्कर को गिरफ्तार किया।
आरपीएफ पोस्ट प्रभारी निरीक्षक प्रदीप कुमार रावत के नेतृत्व में बचपन बचाओ आंदोलन की सहायक परियोजना अधिकारी चंदा गुप्ता तथा चाइल्ड हेल्प डेस्क टीम के साथ संयुक्त अभियान चलाया गया। इस दौरान गया–चेन्नई एक्सप्रेस (12389) के प्लेटफार्म संख्या 4 पर पहुंचने के बाद ट्रेन की जांच की गई। पीछे के जनरल कोच में तीन नाबालिग बच्चे सहमे हुए हालत में मिले, जिनके साथ एक व्यक्ति संदिग्ध अवस्था में पाया गया।
पूछताछ में पता चला कि संदिग्ध व्यक्ति का नाम विरहिन मांझी (30 वर्ष), पुत्र सुखराम मांझी, निवासी गमहरिया, थाना डोभी, जिला गया (बिहार) है। वह बच्चों को काम दिलाने के बहाने गया से चेन्नई ले जा रहा था, जहां उन्हें होटल में बर्तन धुलवाने का कार्य कराया जाना था। बच्चों ने बताया कि उनसे 12 घंटे काम कराकर प्रति माह 14 हजार रुपये मजदूरी देने का झांसा दिया गया था। फिलहाल बच्चों का किराया और भोजन खर्च आरोपी ने ही वहन किया था।
रेस्क्यू किए गए बच्चों की पहचान अनोज कुमार (14 वर्ष), धर्मेंद्र कुमार (16 वर्ष) और राजकुमार (17 वर्ष), निवासी डोभी, गया, बिहार के रूप में हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए तीनों बच्चों को चाइल्ड हेल्प डेस्क को सुरक्षित सुपुर्द कर दिया गया तथा आरोपी विरहिन मांझी को अग्रिम विधिक कार्रवाई हेतु कोतवाली मुगलसराय पुलिस को सौंप दिया गया।
इस कार्रवाई में आरपीएफ के उप निरीक्षक अश्वनी कुमार, आरक्षी दीपक सिंह, संतोष त्रिपाठी, अशोक यादव, बबलू कुमार, सीआईबी के प्रधान आरक्षी विनोद यादव, बचपन बचाओ आंदोलन से चंदा गुप्ता और चाइल्ड हेल्प डेस्क से सुजीत कुमार सक्रिय रूप से शामिल रहे।





