मिलिए इस SDM से, जब मातहतों से आहत होकर एसडीएम बोले मेरे साथ सबका वेतन रोका जाए……….ऐसा क्या हुआ, शिकायतों अनदेखी पर जताई सख्त नाराजगी,खुद को भी कार्रवाई के दायरे में लाए, खुद सहित तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक, लेखपाल, बाबू एवं संबद्ध आशुलिपिक का वेतन रोकने की संस्तुति की
मेरे साथ सबका वेतन रोका जाए…” — तहसील की लचर कार्यप्रणाली से आहत एसडीएम चंद्रप्रकाश गौतम ने पेश की मिसाल
IGRS पोर्टल पर शिकायतों की अनदेखी पर जताई सख्त नाराजगी, खुद को भी कार्रवाई के दायरे में लाए
रायबरेली।
जनता की शिकायतों का गंभीरता से निस्तारण न होना प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल खड़े करता है। लेकिन सलोन तहसील में उपजिलाधिकारी चंद्रप्रकाश गौतम ने एक साहसिक कदम उठाते हुए न केवल अपने मातहतों की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लगाया, बल्कि खुद को भी इस जिम्मेदारी से अछूता नहीं माना।
आइजीआरएस (एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली) पोर्टल पर शिकायतों के लंबित रहने से आहत एसडीएम ने जिलाधिकारी को भेजी आख्या में कहा है कि बार-बार निर्देश देने के बावजूद तहसील के अधिकारी और कर्मचारी अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन नहीं कर रहे हैं। उन्होंने माना कि तहसील की गिरती रैंकिंग और जनता की बढ़ती समस्याओं के लिए केवल अधीनस्थ ही नहीं, बल्कि वे स्वयं भी उत्तरदायी हैं।
इस सख्त आत्मालोचनात्मक रुख में एसडीएम गौतम ने तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक, वासिल बकी नवीस, लेखपाल, बाबू एवं संबद्ध आशुलिपिक के साथ खुद का भी जुलाई माह का वेतन रोके जाने की संस्तुति की है। उन्होंने उल्लेख किया कि कई बार मौखिक और दूरभाष पर निर्देश दिए गए कि पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों का स्थलीय निरीक्षण कर समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए, किन्तु अधिकारियों और कर्मचारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
एसडीएम का यह कदम प्रशासनिक अनुशासन और उत्तरदायित्व की दुर्लभ मिसाल के रूप में देखा जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि अब पूरे जिले में तहसील स्तर पर शिकायत निस्तारण को लेकर एक नई चेतना पैदा हुई है।
प्रशासनिक पारदर्शिता की मिसाल:
एसडीएम गौतम का यह रुख बताता है कि जब तक जिम्मेदारी को व्यक्तिगत स्तर पर न लिया जाए, तब तक तंत्र में सुधार संभव नहीं। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि “अगर जनता की समस्याओं के समाधान में हम विफल हैं, तो इसका उत्तरदायित्व हम सभी का है, न कि किसी एक का।







