Sunday, August 30, 2026
उत्तर-प्रदेशचंदौली

“न प्रचार, न दिखावा… सेवा का ऐसा जुनून! 19वीं बार मुफ्त AC बस से अयोध्या भेजे श्रद्धालु”

मिलिए ऐसे समाजसेवी से, जो चुपचाप कर रहे बड़ा काम: 19वीं बार श्रद्धालुओं को निःशुल्क अयोध्या धाम भेजी वातानुकूलित बस

चंदौली। समाजसेवा हमेशा मंचों और प्रचार की मोहताज नहीं होती। कुछ लोग बिना किसी शोर-शराबे के ऐसे कार्य करते हैं, जिनका लाभ सीधे समाज के लोगों तक पहुंचता है। डैडीज इंटरनेशनल स्कूल एंड हॉस्टल, बिशुनपुरा चंदौली की निःशुल्क तीर्थयात्रा बस सेवा इसका एक ऐसा ही उदाहरण बन चुकी है।

शनिवार, 29 अगस्त 2026 को विद्यालय की वातानुकूलित बस श्रद्धालुओं को लेकर 19वीं बार अयोध्या धाम के लिए रवाना हुई। खास बात यह है कि इस पूरी यात्रा के लिए श्रद्धालुओं से कोई किराया नहीं लिया जाता। क्षेत्र में इस सेवा को लेकर इतना उत्साह है कि आने वाले कई महीनों तक की सीटें आधार कार्ड की छायाप्रति जमा कराकर पहले ही आरक्षित हो चुकी हैं।

इस पहल के पीछे LTP Calculator के आविष्कारक एवं शेयर बाजार और आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ डॉ. विनय प्रकाश तिवारी का मार्गदर्शन है। शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय डैडीज इंटरनेशनल स्कूल जहां कक्षा 12 तक सीबीएसई पाठ्यक्रम के अनुरूप शिक्षा दे रहा है, वहीं कक्षा 6 से विद्यार्थियों को संरचित वित्तीय शिक्षा भी प्रदान की जा रही है।

शिक्षा के साथ सेवा और संस्कार का संदेश

विद्यालय के प्रिंसिपल अजय कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के साथ अनुशासन, संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी विद्यालय की प्राथमिकता है। विद्यालय की यह पहल शिक्षा को समाजसेवा और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने का प्रयास है।

वहीं डॉ. विनय प्रकाश तिवारी ने अयोध्या को केवल तीर्थस्थल नहीं, बल्कि मर्यादा, त्याग, कर्तव्य और आदर्श जीवन की प्रेरणा देने वाली भूमि बताया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन व्यक्ति को चरित्र, धैर्य और कर्तव्य पालन का संदेश देता है।

श्रद्धालुओं में दिखा उत्साह

अयोध्या रवाना होने से पहले तीर्थयात्रियों ने विद्यालय परिसर का भ्रमण किया। उन्होंने विद्यालय में उपलब्ध शैक्षणिक संसाधनों, छात्रावास व्यवस्था और अन्य सुविधाओं की सराहना की। इसके बाद श्रद्धालुओं को लेकर वातानुकूलित बस अयोध्या धाम के लिए रवाना हुई।

19वीं बार आयोजित यह निःशुल्क तीर्थयात्रा सेवा अब केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि क्षेत्र में सेवा और सामाजिक सरोकार की नियमित पहल बनती जा रही है। शिक्षा के साथ तीर्थसेवा और संस्कारों को जोड़ने वाली यह पहल निश्चित रूप से समाज में एक सकारात्मक संदेश दे रही है।

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