Saturday, August 22, 2026
उत्तर-प्रदेशचंदौली

मासूम के मेडिकल में घंटों की देरी ने खोली व्यवस्था की पोल……..रात 11 बजे से दूसरे दिन दोपहर तक चकिया से चंदौली – फिर चकिया दौड़ता रहा डेढ़ वर्षीया पीड़ित परिवार, भड़का था जनाक्रोश तब हुआ मेडिकल……. कहां मर गई थी संवेदनशीलता, विधायक व मंत्री के हस्तक्षेप व लोगों के आक्रोश गए करें……. मेडिकल में देर करने पर लोगों ने की जांच की मांग

चकिया ,चंदौली। डेढ़ वर्ष की मासूम के साथ दुष्कर्म के आरोप में आरोपित की गिरफ्तारी के बाद अब मेडिकल प्रक्रिया में हुई देरी ने स्वास्थ्य व्यवस्था की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के दूसरे दिन भी पीड़ित परिवार की परेशानी खत्म नहीं हुई। रात करीब 11 बजे से अगले दिन दोपहर दो बजे के बाद तक मासूम के मेडिकल के लिए परिजन अस्पतालों के चक्कर काटते रहे। चकिया से चंदौली और फिर चंदौली से चकिया भेजे जाने की प्रक्रिया से परिजनों के साथ स्थानीय लोगों का आक्रोश भी बढ़ता गया।

आक्रोश उस समय और भड़क उठा, जब मासूम को दोबारा मेडिकल के लिए चंदौली भेजे जाने की बात सामने आई। देखते ही देखते जिला संयुक्त चिकित्सालय के इमरजेंसी कक्ष में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग व जनप्रतिनिधि जुट गए। सभासद ज्योति गुप्ता, रवि गुप्ता, राजू वर्मा, मोहन वर्मा, शिवरतन गुप्ता, राजकिशोर , बुद्धू , प्रदीप गुप्ता, राजन गुप्ता व अनिल साहू समेत अन्य लोगों ने अस्पताल प्रशासन से तत्काल सीएमएस को मौके पर बुलाने की मांग की।

मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएमएस मौके पर पहुंचकर परिजनों व स्थानीय लोगों की पूरी बात सुनी। इसके बाद उन्होंने ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक डॉ. रोमा को बुलाकर तत्काल मासूम का मेडिकल परीक्षण कराने का निर्देश दिया। काफी जद्दोजहद के बाद बच्ची का मेडिकल परीक्षण कराया जा सका।

लखनऊ से ही विधायक ने संभाला था मोर्चा

मेडिकल में हो रही देरी की जानकारी मिलते ही क्षेत्रीय विधायक कैलाश आचार्य ने मामले को गंभीरता से लिया। लखनऊ में मौजूद होने के बावजूद विधायक लगातार सीएमएस, सीएमओ, थाना प्रभारी व एसपी से फोन पर संपर्क करते रहे। उन्होंने अधिकारियों से मासूम के मामले में तत्काल संवेदनशीलता बरतते हुए मेडिकल प्रक्रिया पूरी कराने को कहा।

वहीं जिले के प्रभारी मंत्री ने भी मामले में हस्तक्षेप करते हुए अधिकारियों से वार्ता की और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए थे। जनप्रतिनिधियों के लगातार हस्तक्षेप के बाद आखिरकार मेडिकल की प्रक्रिया पूरी हो सकी।

व्यापार मंडल भी पीड़ित परिवार के साथ

मासूम के साथ हुई घटना और मेडिकल में कथित देरी को लेकर व्यापारियों में भी भारी आक्रोश रहा। व्यापार मंडल अध्यक्ष विष्णु जायसवाल के नेतृत्व में मनोज चौहान और अंकित समेत व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने पीड़ित परिवार के साथ खड़े होकर तत्काल मेडिकल और आरोपित के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की।

मासूम की पीड़ा के बीच इतनी देरी क्यों

पूरे घटनाक्रम ने स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जब पीड़िता महज डेढ़ वर्ष की मासूम हो और मामला दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराध से जुड़ा हो, तब मेडिकल जैसी अत्यंत महत्वपूर्ण प्रक्रिया में घंटों की देरी क्यों हुई? परिजनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में पीड़ित परिवार को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भेजने के बजाय संबंधित विभाग के अधिकारियों को आपसी समन्वय बनाकर तत्काल मेडिकल की व्यवस्था करनी चाहिए थी।

घटना ने चकिया नगर के लोगों को झकझोर दिया है। एक ओर पुलिस ने दुष्कर्म के आरोपित को गिरफ्तार कर जेल भेजने की कार्रवाई की है, वहीं दूसरी ओर मेडिकल में हुई कथित देरी को लेकर जिम्मेदारी तय करने की मांग तेज हो गई है।

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