चकिया – वनवासी अंचल में बही रामभक्ति की अविरल धारा……भगवान राम ने शिव धनुष भंग कर सीता को पहनाई,विवाह प्रसंग की मनोहारी झांकी ने मोहा मन….खूब झूमे वनवासी
महुआ बाबा आश्रम में चौथे दिन रामकथा में उमड़ा आस्था का सैलाब
राम-सीता विवाह प्रसंग की मनोहारी झांकी ने मोहा मन
जयमाला, ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष से गूंजा आश्रम परिसर
चकिया (चंदौली)। नौगढ़ तहसील के वनवासी क्षेत्र जमसोती स्थित महुआ बाबा आश्रम में महुआ बाबा समिति की ओर से आयोजित श्रीराम कथा के चौथे दिन श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का अनुपम संगम देखने को मिला। वृंदावन से पधारे कथा व्यास संत दिलीप कृष्ण भारद्वाज जी महाराज ने भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन कर श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। कथा के दौरान भगवान श्रीराम द्वारा शिव धनुष भंग कर माता सीता को जयमाला पहनाने की सजीव झांकी प्रस्तुत की गई, जिसे देखकर पूरा पंडाल ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष से गूंज उठा।

कथा का शुभारंभ विधायक कैलाश आचार्य, भाजपा जिलाध्यक्ष काशीनाथ सिंह, डॉ. गीता शुक्ला, ब्लॉक प्रमुख शंभूनाथ सिंह यादव तथा नगर पंचायत अध्यक्ष गौरव श्रीवास्तव ने श्रीरामचरितमानस का पूजन एवं पुष्प अर्पित कर किया।
कथा व्यास संत मुकेश जी महाराज ने कहा कि धनुष यज्ञ और श्रीराम-सीता विवाह का प्रसंग केवल धार्मिक कथा नहीं, बल्कि मानव जीवन को सही दिशा देने वाला आदर्श है। भगवान श्रीराम द्वारा शिव धनुष भंग करना सत्य, साहस, मर्यादा और धर्म की विजय का प्रतीक है, जबकि माता सीता के साथ उनका विवाह त्याग, विश्वास, समर्पण और पारिवारिक मूल्यों की सर्वोच्च मिसाल प्रस्तुत करता है।
उन्होंने कहा कि जिस परिवार और समाज में श्रीराम और माता सीता के आदर्शों को अपनाया जाता है, वहां प्रेम, सम्मान, संस्कार और सुख-समृद्धि स्वतः स्थापित हो जाती है।
उन्होंने कहा कि रामकथा मनुष्य के भीतर छिपे अहंकार, क्रोध, लोभ और मोह को समाप्त कर सेवा, सदाचार, संयम और राष्ट्रभक्ति का मार्ग प्रशस्त करती है। भगवान श्रीराम का जीवन हमें सिखाता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी मर्यादा, धैर्य और सत्य का साथ कभी नहीं छोड़ना चाहिए। वनवासी क्षेत्रों में रामकथा का आयोजन भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और नैतिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। रामकथा का श्रवण तभी सार्थक है, जब उसके आदर्शों को हम अपने जीवन में भी उतारें।





