कलियुग में हरि-नाम ही परमात्मा प्राप्ति का सर्वोत्तम साधन : मुरारी बापू…….. बनारस, चंदौली से भी आए लोग
कोच्चि (केरल)। राष्ट्रीय संत एवं प्रख्यात रामकथावाचक मुरारी बापू ने कहा कि युगों के अनुसार ईश्वर की आराधना के साधन बदलते रहे हैं, लेकिन कलियुग में भगवान के नाम का स्मरण ही परमात्मा की प्राप्ति का सबसे सरल और सर्वोत्तम मार्ग है। उन्होंने कहा कि सतयुग में ध्यान, त्रेतायुग में यज्ञ, द्वापर में पूजा-उपासना और कलियुग में हरि-नाम का विशेष महत्व है।


केरल के कोच्चि में आयोजित रामकथा के दूसरे दिन श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए मुरारी बापू ने कहा कि जीवन में संयम और संतुलन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सम्यक भोजन, नियंत्रित निद्रा और सदाचार आध्यात्मिक उन्नति के आधार हैं। दिन में अनावश्यक निद्रा और रात्रि में अत्यधिक सोने से बचना चाहिए।
उन्होंने कहा कि संसार में जो जन्म लेता है, उसकी मृत्यु निश्चित है और जन्म-मरण का यह चक्र निरंतर चलता रहता है। दुख और संकट के समय मनुष्य की आंखों से आंसू निकलते हैं और वही आंसू उसे ईश्वर तथा संत-महात्माओं की शरण में जाने के लिए प्रेरित करते हैं।

मुरारी बापू ने कहा कि जब अर्जुन के मन में मोह और संशय उत्पन्न हुआ, तब उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से प्रश्न किए। उन्हीं प्रश्नों के उत्तर के रूप में दिव्य श्रीमद्भगवद्गीता का प्राकट्य हुआ, जो आज भी संपूर्ण मानवता का मार्गदर्शन कर रही है।
उन्होंने हरि-नाम की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि “नाम आराम देता है, नाम विराम देता है और नाम ही विश्राम देता है।” भगवान का नाम मन को शांति, स्थिरता और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करता है।




