Tuesday, June 23, 2026
उत्तर-प्रदेशचंदौली

चंदौली – योगी सरकार के नौ साल बाद भी मंत्रिमंडल से दूर चंदौली……. तीन विधायक, बड़ा जनाधार… फिर भी खाली हाथ चंदौली जिला , वाराणसी पर पीएम के साथ मेहरबान योगी सरकार……..जिले से सौतेला रवैया पर राजनीतिक चर्चा, सैयदराजा के चार बार के विधायक हैं सुशील सिंह और विधायक रमेश पर थी लोगों की आस, इस बार रक्षामंत्री के गृह विधानसभा से भी था लोगों का उम्मीद……2002 के बाद नहीं खुला आजतक खाता

संगठन के उम्मीदों पर खड़ा हर बार उतर रहें हैं मुगलसराय विधायक 

इस बार रक्षामंत्री के गृह विधानसभा से भी था लोगों का उम्मीद 

प्रशांत कुमार, जिला संवाददाता।

चंदौली। प्रदेश मंत्रिमंडल के हालिया विस्तार में एक बार फिर आकांक्षी जनपद चंदौली को प्रतिनिधित्व नहीं मिलने से जिले में राजनीतिक चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। भाजपा समर्थकों व लोगों को उम्मीद थी कि इस बार चंदौली को मंत्रिमंडल में स्थान मिल सकता है । लेकिन कैबिनेट विस्तार के बाद उनकी उम्मीदें अधूरी रह गईं।

नीति आयोग द्वारा आकांक्षी जनपद घोषित किए गए चंदौली को वर्ष 2017 से 2026 तक भाजपा के लगभग नौ वर्ष के शासनकाल में भी मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिल सकी। जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कई बार जनपद का दौरा कर चुके हैं। इसके बावजूद जिले को सत्ता में भागीदारी न मिलना स्थानीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

राजनीतिक रूप से मजबूत माना जाता है चंदौली

चंदौली पूर्वांचल का महत्वपूर्ण जनपद माना जाता है। यहां के पर्यटन स्थल, धार्मिक स्थल, पहाड़ , नदी-नाले, विस्तारित जंगल जिले की अलग पहचान रखते हैं। इसके अलावा पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन देश के सबसे बड़े व महत्वपूर्ण रेलवे जंक्शनों में शुमार है । राजनीतिक दृष्टि से भी जनपद भाजपा के लिए मजबूत आधार माना जाता है।

जिले की चार विधानसभा सीटों में से तीन पर भारतीय जनता पार्टी का कब्जा है। सैयदराजा विधायक सुशील सिंह लगातार चौथी बार विधानसभा में पहुंचे हैं। वहीं रमेश जायसवाल ने मुगलसराय विधानसभा सीट पर भाजपा को मजबूत जीत दिलाई। इसके अलावा कैलाश आचार्य चकिया विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए । जिन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि वाला समर्पित चेहरा माना जाता है।

सुशील सिंह और रमेश जायसवाल को लेकर थी सबसे ज्यादा चर्चा

– कैबिनेट विस्तार में सबसे अधिक चर्चा सुशील सिंह और रमेश जायसवाल को लेकर थी। सुशील सिंह का लगातार चार बार विधायक चुना जाना उनकी मजबूत राजनीतिक पकड़ को दर्शाता है।

वहीं रमेश जायसवाल को भाजपा संगठन का सक्रिय और भरोसेमंद चेहरा माना जाता है। पश्चिम बंगाल, दिल्ली, महाराष्ट्र व हरियाणा विधानसभा चुनावों में रमेश जायसवाल ने संगठनात्मक स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। ऐसे में समर्थकों को उम्मीद थी कि संगठन के प्रति सक्रियता व राजनीतिक संतुलन को देखते हुए उन्हें मंत्रिमंडल में स्थान मिल सकता है। शिक्षक से नेता बने चकिया विधायक कैलाश आचार्य का नाम भी चर्चाओं में रहा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से लंबे समय से जुड़े रहने और संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाने के कारण उनके नाम को भी संभावित मंत्रियों में देखा जा रहा था, लेकिन अंतिम सूची में उन्हें भी स्थान नहीं मिल सका

1997 में बना जिला, अब तक 2002 के बाद से  मंत्री पद से दूर

 लोगों की नाराजगी इस बात को लेकर भी है कि वर्ष 1997 में वाराणसी से अलग होकर चंदौली स्वतंत्र जनपद बना था। जनपद गठन के बाद भाजपा, समाजवादी पार्टी व बहुजन समाज पार्टी की कई सरकारें आईं लेकिन जिले का कोई विधायक मंत्रिमंडल तक नहीं पहुंच सका। बता दें कि 2002 में चंदौली विधायक सभा से बसपा विधायक शारदा प्रसाद को बहन कुमारी मायावती ने अपनी सरकार में राज्यमंत्री बनाया था। 24 साल हो गया लेकिन जनपद का सूखा नहीं खत्म हुआ।

राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो संयुक्त चकिया-चंदौली विधानसभा क्षेत्र से 1970 के दशक में राम लखन को सिंचाई मंत्री बनाया गया था। इसके बाद से यह क्षेत्र मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व के लिए लगातार तरसता चला आ रहा है।

वाराणसी को लगातार प्रतिनिधित्व मिलने पर उठे सवाल वाराणसी जनपद को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। लोगों का कहना है कि वाराणसी से पहले ही कई मंत्री प्रदेश मंत्रिमंडल में शामिल हैं, जबकि हालिया विस्तार में वहां से एक और चेहरे को शामिल किया गया। इसके बाद चंदौली में क्षेत्रीय संतुलन को लेकर सवाल उठने लगे हैं ।

लोगों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र होने के कारण वाराणसी पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी लगातार मेहरबान दिखाई देते हैं, जबकि ठीक पड़ोस में स्थित चंदौली लगातार उपेक्षा झेल रहा है। जिले में अब खुले तौर पर यह सवाल उठ रहा है कि आखिर भाजपा का मजबूत गढ़ होने के बावजूद चंदौली को सत्ता में उचित भागीदारी क्यों नहीं मिल रही?

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