आरपीएफ–पुलिस की जुगलबंदी से तस्करों में दहशत, 70 लाख की अवैध शराब जब्त
प्रशांत कुमार , जिला संवाददाता
मुगलसराय , चंदौली।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय (डीडीयू) रेलवे स्टेशन और यार्ड क्षेत्र में शराब तस्करी के खिलाफ आरपीएफ और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई ने तस्करों के संगठित नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। हालात यह हैं कि तस्करों में इतनी दहशत फैल चुकी है कि वे डीडीयू स्टेशन और यार्ड क्षेत्र को छोड़कर भागने को मजबूर हो गए हैं।
जनवरी से नवंबर 2025 के बीच अलीनगर थाने में शराब तस्करों के खिलाफ 160 मुकदमे दर्ज किए गए हैं। इन मामलों में संयुक्त टीम ने 543 तस्करों को जेल भेजा, जबकि करीब 70 लाख रुपये मूल्य की अवैध शराब को बिहार ले जाए जाने से पहले ही जब्त कर लिया गया।
अलीनगर थाना–आरपीएफ पोस्ट की जुगलबंदी रही निर्णायक
अलीनगर थाना और आरपीएफ पोस्ट की मजबूत जुगलबंदी इस अभियान की रीढ़ साबित हुई। रेलवे स्टेशन, यार्ड और आउटर एरिया में साझा गश्त, संयुक्त चेकिंग और त्वरित कार्रवाई से तस्करों की हर चाल नाकाम कर दी गई।
पुलिस अधीक्षक आदित्य लाग्हे ने बताया कि “शराब तस्करी के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है। रेलवे और पुलिस की संयुक्त टीम लगातार निगरानी कर रही है। अलीनगर थाने में दर्ज मुकदमों के आधार पर तस्करों को जेल भेजा गया है। यह अभियान आगे भी पूरी सख्ती से जारी रहेगा।”
वहीं आरपीएफ कमांडेंट जेथिन बी. राज का बयान है कि
“डीडीयू जंक्शन देश के प्रमुख रेल जंक्शनों में से एक है। यहां शराब तस्करी को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पुलिस के साथ बेहतर समन्वय और सटीक रणनीति के कारण तस्करों पर प्रभावी कार्रवाई संभव हो पाई है।” आगे भी ऐसी हरकत करने वालों को जेल भेजा जायेगा।
जुलाई में सबसे बड़ा एक्शन
जुलाई माह में अभियान ने सबसे बड़ा रूप लिया, जब एक ही महीने में 143 तस्करों को जेल भेजा गया। इसके बाद से स्टेशन और यार्ड क्षेत्र में तस्करी की गतिविधियां लगभग समाप्त हो गई हैं।
मुखबिर तंत्र बना गेमचेंजर
आरपीएफ निरीक्षक प्रदीप रावत द्वारा विकसित मजबूत मुखबिर तंत्र ने कार्रवाई को निर्णायक बनाया। समय पर मिली सटीक सूचनाओं के आधार पर कई बड़ी खेपों को पकड़ा गया।
डीडीयू स्टेशन पर दिखा सख्ती का असर
संयुक्त अभियान का असर अब साफ नजर आ रहा है। कभी शराब तस्करी का बड़ा ट्रांजिट प्वाइंट रहा डीडीयू स्टेशन और यार्ड क्षेत्र अब तस्करों के लिए सबसे असुरक्षित इलाका बन चुका है।
रणनीति रही सबसे बड़ी ताकत
एसपी आदित्य लाग्हे और आरपीएफ कमांडेंट जेथिन बी. राज की संयुक्त रणनीति इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत साबित हुई। दोनों अधिकारियों के निर्देशन में पुलिस और आरपीएफ की टीमों ने योजनाबद्ध तरीके से तस्करों पर शिकंजा कसा