Tuesday, June 23, 2026
उत्तर-प्रदेशचंदौली

चकिया- शिक्षा के प्रति समर्पण की मिसाल बने चेयरमैन गौरव, मार्च में किए थे घोषणा…….पुरातन छात्र ने निजी धनराशि से कॉलेज को 71 हजार की पुस्तकें 270 किया महाविद्यालय को भेंट…. छात्रों में दौड़ी खुशी की लहर, जताया आभार,, 1996 से 1999 तक थे महाविद्यालय के

 

चकिया (चंदौली)।

शिक्षा के क्षेत्र में प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत करते हुए नगर पंचायत चेयरमैन एवं सावित्रीबाई फुले राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के पुरातन छात्र गौरव श्रीवास्तव ने बुधवार को अपने ही गुरुकुल को 71 हजार रुपये मूल्य की 270 पुस्तकें भेंट कीं। यह सभी पुस्तकें हिंदी और समाजशास्त्र विषयों से संबंधित हैं, जिन्हें गौरव श्रीवास्तव ने निजी धनराशि से क्रय किया। उनके इस योगदान से महाविद्यालय का पुस्तकालय और समृद्ध हुआ है, वहीं छात्रों में उत्साह और खुशी की लहर दौड़ गई।

मार्च माह में आयोजित टेबलेट वितरण समारोह के दौरान चेयरमैन गौरव श्रीवास्तव ने घोषणा की थी कि वे विद्यार्थियों के हित में पुस्तकें उपलब्ध कराएंगे। बुधवार को उन्होंने अपनी घोषणा को पूरा करते हुए पुस्तकें महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. संगीता सिन्हा को ससम्मान भेंट कीं।

समारोह में चेयरमैन गौरव श्रीवास्तव ने कहा—“मैंने 1996 से 1999 तक इसी महाविद्यालय में अध्ययन किया। उस समय किताबों की कमी हमेशा महसूस होती थी। आज जो भी उपलब्धि मिली है, वह मेरे गुरुजनों के आशीर्वाद से संभव हुई। इसलिए मैंने ठाना कि आने वाली पीढ़ी को पढ़ाई में किसी तरह की कमी नहीं होनी चाहिए। यह पुस्तक दान मेरे जीवन के सबसे संतोषजनक कार्यों में से एक है।”

महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. संगीता सिन्हा ने चेयरमैन गौरव श्रीवास्तव के इस कदम की सराहना करते हुए कहा—“गौरव श्रीवास्तव जी ने जिस संवेदनशीलता और शिक्षा-प्रेम का परिचय दिया है, वह समाज के लिए प्रेरणादायक है। आज के समय में जब लोग व्यस्तता में अपने गुरुकुल को भूल जाते हैं, वहीं गौरव जी ने अपने कॉलेज को कुछ लौटाने का जो संकल्प लिया, वह अनुकरणीय है। यह अन्य पुरातन छात्रों के लिए भी एक सुंदर उदाहरण बनेगा।” उन्होंने कहा कि इन पुस्तकों के माध्यम से छात्रों को अध्ययन सामग्री का नया आधार मिलेगा और पुस्तकालय में शैक्षणिक संसाधन और बढ़ेंगे।

कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षक डॉ. मिथिलेश सिंह, डॉ. अमिता सिन्हा, डॉ. सरवन यादव, आदि ने भी चेयरमैन के इस योगदान को सराहनीय बताया। उन्होंने कहा कि यह कदम गुरु-शिष्य परंपरा की भावना को पुनर्जीवित करता है। छात्रों ने कहा कि अब उन्हें अध्ययन में सहूलियत होगी और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी जरूरी किताबें उपलब्ध रहेंगी।

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