Tuesday, June 23, 2026
उत्तर-प्रदेशचंदौली

सपा ने किया बड़ी कार्रवाई, अपने 3 विधायकों को सपा मुखिया अखिलेश ने किया बाहर……लगा गंभीर आरोप,, इस विधायक के घर गए थे गृहमंत्री

पूर्वांचल पोस्ट न्यूज, लखनऊ

समाजवादी पार्टी ने बड़ा संगठनात्मक कदम उठाते हुए अपने तीन विधायकों—गोसाईंगंज से विधायक अभय सिंह, गौरीगंज से विधायक राकेश प्रताप सिंह और ऊंचाहार से विधायक मनोज कुमार पांडेय को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। पार्टी ने इन पर सांप्रदायिक और विभाजनकारी राजनीति को बढ़ावा देने के साथ-साथ किसान विरोधी, महिला विरोधी, युवा विरोधी और व्यापार विरोधी नीतियों का समर्थन करने का गंभीर आरोप लगाया है।

समाजवादी पार्टी ने इस कार्रवाई की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर साझा करते हुए कहा कि इन विधायकों ने “सांप्रदायिक विभाजनकारी नकारात्मकता और जनविरोधी विचारधारा का समर्थन किया, जो पार्टी की मूल विचारधारा के विपरीत है।” पार्टी ने यह भी लिखा कि “पीडीए विरोधी” सोच रखने वालों के लिए संगठन में कोई स्थान नहीं है।

सपा की पोस्ट में स्पष्ट किया गया कि इन विधायकों को पूर्व में “हृदय परिवर्तन के लिए अनुग्रह-अवधि” भी दी गई थी, जिसकी समय-सीमा अब समाप्त हो चुकी है। पार्टी ने कहा कि भविष्य में जनविरोधी और संगठन विरोधी सोच रखने वाले किसी भी नेता के लिए समाजवादी पार्टी में कोई जगह नहीं होगी।

अमित शाह की ‘भेंट’ बनी चर्चा

विशेष रूप से ऊंचाहार विधायक मनोज कुमार पांडेय को लेकर सियासी हलकों में चर्चाएं तेज हैं। माना जा रहा है कि उन्होंने राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग कर भाजपा का साथ दिया था। इसके बाद से वह लगातार भाजपा खेमे के करीब नजर आने लगे थे।

बताया जा रहा है कि लोकसभा चुनाव से ठीक पहले गृहमंत्री अमित शाह खुद रायबरेली में उनके आवास पर पहुंचे थे। इसे एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत माना गया। चर्चा थी कि भाजपा उन्हें रायबरेली से लोकसभा का टिकट दे सकती है, हालांकि बाद में यह टिकट दिनेश प्रताप सिंह को दिया गया।

मनोज पांडेय ने दिनेश प्रताप सिंह की चुनाव सभाओं से दूरी बनाए रखी, जिससे उनकी नाराजगी और संभावित सियासी पाला बदलने की अटकलें तेज हो गई थीं।

सियासी हलचल तेज

सपा की इस कार्रवाई के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए पार्टी की सख्त अनुशासन नीति का संकेत है। साथ ही, पार्टी अपने ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) जनाधार को साधने के लिए विचारधारा के स्तर पर कोई समझौता नहीं करना चाहती।

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