चकिया, जब सभासद ने डीएम को कराया अवगत, 13 साल से अधूरी है परियोजना……..नगर पंचायत चकिया में बनी बहुमंजिला इमारत आज तक हैंडओवर नहीं, तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती के कार्यकाल में शुरू हुई थी योजना, DM ने निर्देश पर तत्काल गए EO व पीओ, रिपोर्ट प्रस्तुत करे
चकिया (चंदौली)।
आदर्श नगर पंचायत चकिया वार्ड संख्या 4 कबीर नगर में आईएचएसडीपी योजना के तहत वर्ष 2011 में 118 लाख रुपये की लागत से बनाई जा रही 48 कमरों की बहुमंजिला इमारत आज तक नगर पंचायत को हैंडओवर नहीं हो पाई है। शनिवार को आयोजित सम्पूर्ण समाधान दिवस के दौरान वार्ड के सभासद केशरी नंदन ने जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग को इस गंभीर समस्या से अवगत कराया।
बिना बाउंड्री, सीवर और पार्क अधूरा पड़ा है परिसर
सभासद केशरी नंद ने बताया कि इमारत चारों ओर से अब भी बिना बाउंड्रीवाल के अधूरी है। जिससे बरसात में खेतों का पानी सीधे परिसर में भर जाता है। जल निकासी की कोई व्यवस्था न होने से गंदगी, कीचड़ व जलभराव से लोग परेशान हैं। साथ ही प्रस्तावित पार्क का निर्माण आज तक नहीं हो सका।
दबंगों का कब्जा, गरीब परिवार बेहाल
दो मंजिला इमारत में बने मीटिंग हॉल के कई कमरों पर कुछ दबंगों ने कब्जा जमा लिया है। उनमें भुसा भरकर ताले जड़ दिए गए हैं। डूडा विभाग ने बीते वर्ष नगर के 48 गरीबों को कमरों का आवंटन कर दिया था, लेकिन कई परिवार आज भी तिरपाल लगाकर बाहर रहने को मजबूर हैं क्योंकि कमरों पर पहले से ही कब्जा है।
2011 से अब तक लटकी योजना, मंत्री को भी दी गई थी जानकारी
सभासद ने बताया कि यह परियोजना तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती के कार्यकाल में शुरू हुई थी, लेकिन 13 वर्षों में भी पूरी नहीं हो पाई। उन्होंने 25 मार्च को जनपद के प्रभारी मंत्री संजीव गोंड को पत्र सौंपा, जिस पर मंत्री ने जिलाधिकारी से वार्ता की और कार्रवाई का आश्वासन दिया था।
डीएम ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट, एजेंसी से होगी पूछताछ
डीएम के निर्देश पर शनिवार को डूडा पीओ राकेश , नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी दिनेश कुमार व वरिष्ठ लिपिक राकेश रोशन ने मौके का निरीक्षण किया और रह रहे लोगों से बातचीत की। डूडा पीओ ने बताया कि निर्माण एजेंसी के अधिकारियों को तलब किया गया है। उनके आने पर ही यह साफ होगा कि क्या-क्या कार्य लंबित हैं।
जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि परियोजना से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट शीघ्र प्रस्तुत की जाए, ताकि सभी लंबित कार्यों को जल्द पूरा कर भवन को नगर पंचायत को सुपुर्द किया जा सके।
बता दें कि 2011 में 118 लाख की लागत से शुरू हुई योजना। जो आज तक नगर पंचायत को हैंडओवर नहीं। अभी तक बाउंड्री, सीवर, पार्क और कब्जा सबसे बड़ी समस्या हैं। कुछ लोग रह रहे, कुछ आज भी तिरपाल में मजबूर। पार्क भी नहीं बना है।








