अफगानिस्तान में जंग अभी जारी है……इन हाथों में है तालिबान के खिलाफ लड़ाई की कमान…..
पूर्वांचल पोस्ट न्यूज नेटवर्क
नई दिल्ली। अफगानिस्तान में बड़े हिस्से पर कब्जा कर तालिबान ने भले ही फतह का दावा कर दिया है। लेकिन अभी जंग खत्म नहीं हुई है। एक धड़ा अभी भी लगातार तालिबान के खिलाफ लड़ रहा है।
अमरुल्ला सालेह
तालिबान के खिलाफ लड़ाई में सबसे पहला नाम अमरुल्ला सालेह का आता है। वह अफगानिस्तान के फर्स्ट वाइस प्रेसिडेंट एफपीवी थे और राष्ट्रपति अशरफ गनी के देश छोड़ने के बाद संविधान के तहत उन्होंने स्वयं को देश का कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित कर दिया है। पिछले ढाई दशक से तालिबान के खिलाफ लड़ रहे सालेह ने कहा है कि वह अफगानिस्तान के लोगों के साथ खड़े हैं और जंग अभी खत्म नहीं हुई है।
अहमद मसूद
पंजशीर अफगानिस्तान का इकलौता प्रांत है जहां अब तक तालिबान कब्जा नहीं कर पाया है। यहां तालिबान से लोहा लेने वालों में नॉर्दर्न अलायंस के अहमद मसूद का नाम सबसे अहम है। हाल में सालेह से उनकी मुलाकात की तस्वीर सामने आई थी। अहमद मसूद के पिता अहमद शाह मसूद को अफगानिस्तान की सबसे ताकतवर शख्सियतों में शुमार किया जाता था। 2001 में अल कायदा और तालिबान ने मिलकर उनकी हत्या कर दी थी। अब अहमद मसूद तालिबान को हर हाल में रोकने के लिए संघर्षरत हैं।
अता मुहम्मद नूर
जमात.ए.इस्लामी के प्रमुख और बल्ख प्रांत के पूर्व गवर्नर अता मुहम्मद नूर भी तालिबान के खिलाफ मोर्चा संभाले लोगों में शामिल हैं। जब 1996 में तालिबान ने अफगानिस्तान में सत्ता संभाली तो उन्होंने अहमद शाह मसूद के साथ मिलकर तालिबान के खिलाफ एक संयुक्त मोर्चा तैयार किया था। अभी बल्ख प्रांत पर तालिबान के कब्जे के बाद से माना जा रहा है कि वह ताजिकिस्तान के इलाके में चले गए हैं।


