चकिया – इतिहास दोहराने को तैयार चकिया, 112 साल पुरानी परम्परा को निभाने की तैयारी में जुटा नगर पंचायत प्रशासन…….. राष्ट्रीय कौमी एकता का प्रतीक, ऐतिहासिक परंपरा का निर्वाह: 112 साल पुरानी विरासत फिर होगी जीवंत, चकिया में गूंजेंगे……1914 से चली आ रही विरासत
लतीफशाह मेले में इस बार भी सजेगी सुरों की महफिल, 17 सितंबर को विराट कजरी प्रतियोगिता
इतिहास दोहराने को तैयार चकिया, 112 साल पुरानी कजरी परंपरा में जुटेंगे लोकगायक
ऐतिहासिक परंपरा का निर्वाह: 112 साल पुरानी विरासत फिर होगी जीवंत, चकिया में गूंजेंगे कजरी के सुर
चकिया, चंदौली । जनपद चंदौली की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरती चकिया एक बार फिर लोकगीतों की मधुर स्वर लहरियों से गूंजने को तैयार है। वर्ष 1914 ईस्वी से चली आ रही राष्ट्रीय एवं सांस्कृतिक सद्भावना की प्रतीक लतीफशाह मेला परंपरा के तहत इस वर्ष भी विराट कजरी एवं लोकगीत प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा।
आदर्श नगर पंचायत चकिया के तत्वावधान में आयोजित होने वाले विराट कजरी/लोकगीत प्रतियोगिता महोत्सव-2026 का आयोजन 17 सितंबर, गुरुवार को दोपहर 12 बजे से उपजिलाधिकारी चकिया के आवास परिसर स्थित वटवृक्ष के नीचे होगा। आयोजन को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
लतीफशाह मेले के दूसरे दिन भगवान श्रीकृष्ण की बरही के अवसर पर होने वाली यह प्रतियोगिता चकिया की लोक-सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आयोजन में क्षेत्र के लोकगायक कजरी और लोकगीतों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।
लोक संस्कृति को बचाना हम सबकी जिम्मेदारी : गौरव
नगर पंचायत अध्यक्ष गौरव श्रीवास्तव ने कहा कि चकिया की पहचान केवल उसके प्राकृतिक सौंदर्य से ही नहीं, बल्कि उसकी समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक परंपराओं से भी है। वर्ष 1914 से चली आ रही कजरी की यह परंपरा हमारी अमूल्य विरासत है। उन्होंने कहा कि बदलते समय में लोकगीत और लोक संस्कृति की परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। नगर पंचायत का प्रयास है कि इस आयोजन को और भव्य स्वरूप देकर स्थानीय कलाकारों को मंच उपलब्ध कराया जाए और चकिया की ऐतिहासिक सांस्कृतिक पहचान को मजबूती मिले।
उन्होंने क्षेत्रवासियों से अपील की कि 17 सितंबर को अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर लोक कलाकारों का उत्साहवर्धन करें और कजरी की इस ऐतिहासिक परंपरा के साक्षी बनें।
छह गीतों पर होगी सुरों की परीक्षा
प्रतियोगिता में प्रतिभागियों के लिए छह विषय निर्धारित किए गए हैं। इनमें ‘रिमझिम सरस सुहावन’, ‘कैसा था यह देश हमारा’, ‘मिटत ना बढ़त दरिद्रगी’, ‘क इहे धराई धीरज’, ‘जियबो मोहल लागे सजना’ और ‘तोड़ के चूड़ी कंगना’ जैसे गीत शामिल हैं।
प्रत्येक गायकी पार्टी को प्रस्तुति के लिए 10 मिनट का समय दिया जाएगा। कुल 50 अंकों में साहित्य, भाषा, भाव एवं शैली के लिए 20 अंक, गायकी एवं प्रस्तुतीकरण के लिए 15 अंक तथा साज-सज्जा के लिए 15 अंक निर्धारित किए गए हैं।
पहले तीन स्थान पाने वालों को मिलेगा सम्मान
प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले गायकों को पुरस्कार, प्रमाण-पत्र और सांत्वना पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। प्रत्येक गायक के लिए अपनी लोकगीत पार्टी के साथ प्रतियोगिता में भाग लेना अनिवार्य होगा। समय से उपस्थित नहीं होने वाले कलाकारों को बाद में अवसर नहीं दिया जाएगा।
आयोजकों के अनुसार विषय से संबंधित प्रतिभागी एक गीत तथा अपनी पसंद का एक अन्य गीत भी प्रस्तुत कर सकेंगे। नगरवासियों से कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर लोकगीत और कजरी की इस समृद्ध परंपरा का आनंद लेने तथा कलाकारों का उत्साहवर्धन करने की अपील की गई है।
कार्यक्रम संयोजक दिनेश कुमार, अधिशासी अधिकारी नगर पंचायत चकिया, कार्यक्रम संचालक नरेंद्र कुमार श्रीवास्तव एवं पत्रकार आशुतोष मिश्र, आयोजक/निवेदक गौरव श्रीवास्तव, संरक्षण में पुलिस क्षेत्राधिकारी अजीत कुमार चौहान तथा संरक्षक उप जिलाधिकारी विकास मित्तल सहित नगर पंचायत के सम्मानित सदस्यों की सहभागिता रहेगी।
112 साल पुरानी यह परंपरा इस बार भी चकिया की सांस्कृतिक पहचान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और लोकगीतों की मिठास को जीवंत रखने का संदेश देगी।