Sunday, June 14, 2026
उत्तर-प्रदेशचंदौली

चकिया- जहां नहीं जाती थी बारात, वहां पहुंचा प्रशासन; डंडा लेकर मैदान में उतरे तहसीलदार, 10 साल से उलझा विवाद घंटों में हुआ खत्म…… लौटी खुशियां…….18 लेखपालों व जवानों के साथ पहुंचे तहसीलदार, सालों से लगा रहे थे चक्कर

चकिया/शहाबगंज। शहाबगंज क्षेत्र के हरिपुर गांव में लगभग 10 वर्षों से चला आ रहा जलनिकासी और रास्ते का विवाद आखिरकार समाप्त हो गया। वर्षों से इस समस्या से जूझ रहे ग्रामीण तहसील और प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर लगा रहे थे, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पा रहा था। बरसात के दिनों में गांव की सड़कें और रास्ते जलमग्न हो जाते थे, जिससे लोगों का आवागमन प्रभावित रहता था। स्थिति इतनी खराब हो गई थी कि कई परिवार अपनी बेटियों की शादी गांव में करने से कतराने लगे थे और बारातों के आने-जाने में भी दिक्कतें होती थीं।

ग्रामीणों के अनुसार, पक्की सड़क निर्माण के बाद जलनिकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से बारिश का पानी जमा होकर तालाब का रूप ले लेता था। वर्षों से चली आ रही इस समस्या को लेकर ग्रामीण लगातार अधिकारियों के पास गुहार लगा रहे थे, लेकिन समाधान नहीं हो पा रहा था। स्वच्छ भारत मिशन के तहत भी समस्या का निस्तारण नहीं हो सका था।

मामले की गंभीरता को देखते हुए उपजिलाधिकारी (एसडीएम) चकिया पवन कुमार यादव ने तहसीलदार देवेंद्र कुमार के नेतृत्व में राजस्व, पुलिस और लेखपालों की संयुक्त टीम गठित की। इसके बाद तहसीलदार देवेंद्र कुमार ने स्वयं मोर्चा संभालते हुए मौके पर पहुंचकर विवाद के समाधान की कमान संभाली।

बारिश की फुहारों के बीच प्रशासनिक टीम लगातार मौके पर डटी रही। तहसीलदार देवेंद्र कुमार की निगरानी में लगभग 500 मीटर लंबी नाली का निर्माण कराया गया, जिससे वर्षों से चली आ रही जलनिकासी की समस्या का समाधान संभव हो सका। निर्माण कार्य के दौरान शहाबगंज थाना प्रभारी निरीक्षक के.पी. सिंह, राजस्व निरीक्षक जितेंद्र सिंह, क्षेत्र के 18 लेखपालों तथा पुलिस बल ने सक्रिय भूमिका निभाई।

लेखपाल दीपक, प्रदीप, बजरंगबली, अश्विनी, अखिल, मनीष, सुनील सहित पूरी राजस्व टीम ने मौके पर मौजूद रहकर कार्य को सफल बनाया। प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी और सतत प्रयासों से विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त कराया गया।

ग्रामीणों ने प्रशासन के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि वर्षों बाद उनकी समस्या का स्थायी समाधान हुआ है। अब बरसात में जलभराव की समस्या से राहत मिलेगी, आवागमन सुगम होगा और गांव में शादी-विवाह जैसे सामाजिक कार्यक्रम भी बिना किसी बाधा के संपन्न हो सकेंगे।

ग्रामीणों का कहना है कि जिस गांव में कभी जलभराव और विवाद के कारण बारात आने से लोग कतराते थे, वहां अब विकास और राहत की नई उम्मीद जगी है।

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