शराब घोटाले में फंसे सांसद, 3200 करोड़ के घोटाले में पीवी मिधुन रेड्डी गिरफ्तार
हर महीने 60 करोड़ की रिश्वत, SIT की कार्रवाई में बड़ा नाम आया गिरफ्त में
नई दिल्ली।
राजनीति और घोटालों का पुराना नाता एक बार फिर उजागर हुआ जब आंध्र प्रदेश के राजमपेट से लोकसभा सांसद पीवी मिधुन रेड्डी को राज्य की विशेष जांच दल (SIT) ने 3200 करोड़ रुपये के बहुचर्चित शराब घोटाले में गिरफ्तार कर लिया। शनिवार शाम विजयवाड़ा में कई घंटों की पूछताछ के बाद करीब 7:30 बजे गिरफ्तारी की गई। राज्य की गृह मंत्री वंगालापुडी अनिता ने उनकी गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए कहा कि उन्हें अदालत में पेश करने की प्रक्रिया चल रही है।
घोटाले में शामिल प्रमुख नामों में मिधुन रेड्डी के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी के करीबी माने जाने वाले कासिरेड्डी राजा शेखर रेड्डी, पूर्व सांसद वी. विजय साई रेड्डी, सज्जला श्रीधर रेड्डी, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी धनुंजय रेड्डी, और अन्य बड़े नाम शामिल हैं।
ईडी ने भी दर्ज किया है मनी लॉन्ड्रिंग का मामला
मई महीने में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी इस घोटाले की जांच शुरू करते हुए मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था। SIT द्वारा दायर रिमांड रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि किस तरह लोकप्रिय शराब ब्रांडों को बंद कर ‘ब्लू-आइड ब्रांड्स’ को तरजीह दी गई और इस पूरी प्रक्रिया में करोड़ों की रिश्वत ली जाती रही।
रिश्वत का हिसाब—हर महीने 60 करोड़!
SIT रिपोर्ट के अनुसार, घोटाले के केंद्र में रहे कासिरेड्डी राजा शेखर रेड्डी प्रति माह 60 करोड़ रुपये तक की रिश्वत वसूलते थे, जिसे बाद में मिधुन रेड्डी और अन्य तक पहुंचाया जाता था। यह घोटाला न केवल आर्थिक अपराध की गहराई को दर्शाता है, बल्कि सत्ता के गलियारों में बैठे लोगों की संलिप्तता को भी उजागर करता है।
विपक्ष का आरोप—”यह बदले की कार्रवाई”
विपक्ष ने इस गिरफ्तारी को राजनीतिक प्रतिशोध करार देते हुए मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू पर तीखा हमला बोला है। वाईएसआरसीपी के वरिष्ठ नेता मल्लादी विष्णु ने कहा कि, “यह सब एक साजिश का हिस्सा है। पार्टी नेतृत्व के करीबी लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।”
वहीं पार्टी के एक और वरिष्ठ नेता एल. अप्पी रेड्डी ने कहा, “मिधुन रेड्डी के परिवार की राजनीति में गहरी पैठ रही है। मुझे भरोसा है कि न्याय मिलेगा और अदालत निष्पक्षता से काम करेगी।”
निष्कर्ष—सत्ता, शराब और साजिश!
एक ओर जहां सरकार घोटालों पर लगाम कसने की बात कर रही है, वहीं विपक्ष इसे सत्ता की ‘प्रतिशोध की राजनीति’ बता रहा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि देश की न्यायपालिका इस पूरे प्रकरण पर क्या रुख अपनाती है, लेकिन इतना तय है कि शराब घोटाले की यह बोतल अब खुल चुकी है, और इसकी महक दूर तक जाएगी।