प्रादेशिक खबर। राजस्थान से। पूर्वांचल पोस्ट न्यूज नेटवर्क
राजस्थान पेट्रोलियम डीलर्स एसो. ने पेट्रोल-डीजल पर वैट कम नहीं करने सहित अन्य मांगों को लेकर हड़ताल पर जाने का फैसला किया है। इस संबंध में आज 10 मार्च से 12 मार्च तक प्रदेश में कोई भी डीलर किसी भी प्रकार से पेट्रोल-डीजल की खरीदी-बिक्री नहीं करेगा। हड़ताल के ऐलान के बाद शनिवार को प्रदेश के कई जिलों में पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल-डीजल भरवाने के लिए गाड़ियों की लाइनें देखी गईं। पेट्रोल पंपों की यह दो दिवसीय हड़ताल 10 मार्च को सवेरे शुरू होगी जो 12 मार्च सवेरे तक जारी रहेगी।

11 मार्च को मौन रैली
जयपुर में इन मांगों को लेकर 11 मार्च को स्टैच्यू सर्कल से सचिवालय तक डीलर्स की एक मौन रैली भी निकाली जाएगी। इस आशय का पत्र राजस्थान पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह भाटी के हस्ताक्षर के साथ जारी कर दिया गया है।
सुबह 6 बजे से अगले 48 घंटों के लिए नो परचेज नो सेल हड़ताल
राजस्थान पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष संदीप बगेरिया ने कहा कि राजस्थान पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन ने सुबह 6 बजे से अगले 48 घंटों के लिए “नो परचेज नो सेल” हड़ताल की घोषणा की है। इसका उद्देश्य हड़ताल को खत्म करना है। राज्य में ईंधन की ऊंची कीमतों पर सरकार का ध्यान। पीएम नरेंद्र मोदी ने वादा किया था कि बीजेपी सरकार पेट्रोल की कीमतें कम करेगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। हमारे व्यापार संघ के 33% डीलर बंद होने की कगार पर हैं।
पेट्रोल की कीमतें कम करने की जरूरत- एसोसिएशन
उन्होंने कहा कि राजस्थान में पेट्रोल पर सबसे ज्यादा वैट है, इसलिए राज्य में पेट्रोल की कीमतें कम करने की जरूरत है, जो अन्य राज्यों की कीमतों के बराबर हैं। कोविड के दौरान सरकार ने पेट्रोल की कीमतों पर वैट बढ़ा दिया था। जिन्हें संशोधित नहीं किया गया है। अब हम इस हड़ताल के माध्यम से सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं, जिससे दाम कम कराए जा सकें।
‘पड़ोसी राज्यों में सस्ता तेल’
एसोसियेशन के एक अधिकारी ने कहा कि चुनव के समय बीजेपी ने इसे मुद्दा बनाया था। लेकिन दिसंबर में सरकार बनने के बाद अभी तक इस विषय में कोई बात की गई है। उन्होंने कहा कि राजस्थान की सीमा से पंजाब, हरियाणा, गुजरात, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश लगते हैं। इन सभी राज्यों में डीजल-पेट्रोल सस्ता है, लेकिन यहां महंगा है। सीमाई इलाकों में लोग इन राज्यों में जाकर तेल की खरीद कर रहे हैं। इसका परिणाम यह है कि कई सीमाई पंप बंद होने की कगार पर हैं।
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