चिलराहा तालाब में 10 साल का खेल बेनकाब: पट्टा निरस्त, लाखों की रिकवरी की तैयारी……लाखों के राजस्व नुकसान का अंदेशा, रिकवरी की तैयारी; जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में.
चकिया (चंदौली)। विकासखंड चकिया के चर्चित “चिलराहा तालाब में मछली पालन पट्टे को लेकर वर्षों से चल रहे कथित खेल पर आखिरकार प्रशासन का शिकंजा कस गया है। तहसीलदार देवेंद्र कुमार की जांच में सामने आई अनियमितताओं के बाद विवादित पट्टा निरस्त कर दिया गया है। मामले में राजस्व विभाग अब सरकारी नुकसान का आकलन कर रिकवरी की तैयारी में जुट गया है।
जांच में सामने आया कि वर्ष 2014 से संचालित पट्टे के आधार पर स्वीकृत भूमि से कहीं अधिक क्षेत्र में मछली पालन किया जा रहा था। आरोप है कि चिल्हता तालाब से लेकर बंधी तक करीब 400 बीघे से अधिक जलक्षेत्र का उपयोग किया जाता रहा, जिससे हर वर्ष लाखों रुपये का आर्थिक लाभ अर्जित किया जाता था। जबकि अभिलेखों में दर्ज भूमि का क्षेत्रफल इससे काफी कम बताया गया है। पट्टा चकिया विकासखंड के प्रधान संघ अध्यक्ष रामलाल यादव व अरविंद सिंह को हुआ था। इन दोनों लोग से रिकवरी करने की तैयारी शुरू हो गई है
तहसील प्रशासन द्वारा अभिलेखों की जांच और स्थलीय सत्यापन के दौरान कई गंभीर विसंगतियां सामने आईं। इसके बाद पट्टा निरस्त करने की कार्रवाई की गई। मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा है कि वर्षों से कुछ प्रभावशाली लोगों का इस पर वर्चस्व बना हुआ था और लगातार इसका लाभ उठाया जा रहा था।
“किसी को नहीं छोड़ा जाएगा” : तहसीलदार
तहसीलदार देवेंद्र कुमार ने स्पष्ट कहा कि सरकारी संपत्तियों और राजस्व से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी।
तहसीलदार ने कहा कि केवल लाभ लेने वालों पर ही नहीं, बल्कि पूरे मामले में लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जाएगी। किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
उन्होंने बताया कि पूरे प्रकरण की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। साथ ही राजस्व क्षति का आंकलन कर रिकवरी की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।
ग्रामीणों में चर्चा, प्रशासनिक हलकों में हड़कंप
पट्टा निरस्त होने के बाद गांव से लेकर तहसील मुख्यालय तक इस कार्रवाई की चर्चा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं होती तो वर्षों से चल रहा यह मामला कभी सामने नहीं आता। वहीं प्रशासनिक गलियारों में भी इस कार्रवाई को बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
मुख्य बातें
वर्ष 2014 से संचालित था मछली पालन पट्टा।
चिल्हता तालाब से बंधी तक 400 बीघे से अधिक क्षेत्र उपयोग करने का आरोप।
तहसीलदार की जांच में सामने आईं गंभीर अनियमितताएं।
विवादित पट्टा किया गया निरस्त।
लाखों रुपये की राजस्व क्षति की जांच।
रिकवरी की तैयारी शुरू।
लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों पर भी होगी कार्रवाई।