मृत्यु लोक में अमृत बरसा रही राम कथा, कथा शिव के हृदय से शुरू होती है, राम नाम ही जीवन का मूल मंत्र : मुरारी बापू

मृत्यु नहीं, महिमा है; राम कथा अमृत और राम नाम ही जीवन का मूल मंत्र है : मुरारी बापू
कोच्चि (केरल)। जीवन और मृत्यु के रहस्यों पर आध्यात्मिक प्रकाश डालते हुए राष्ट्रीय संत एवं प्रख्यात रामकथावाचक मुरारी बापू ने कहा कि मृत्यु भय का विषय नहीं, बल्कि ईश्वर की महिमा का एक स्वरूप है। उन्होंने कहा कि राम और कृष्ण की कथाएं मनुष्य को जीवन का वास्तविक सत्य समझने का मार्ग दिखाती हैं।
कोच्चि के ग्रैंड हयात स्थित लुलु बोलगट्टी इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में 13 जून से चल रही नौ दिवसीय श्रीराम कथा के चौथे दिन बापू ने कहा, “कृष्ण मृत्यु भी हैं और अमृत भी। जाकी रही भावना जैसी, वैसा ही अनुभव होता है। कृष्ण मृत्यु लोक में आए हैं और उनकी कथा इस मृत्यु लोक में अमृत के समान है। मृत्यु महिमा मात्र है।”

उन्होंने कहा कि “राम मृत्यु भी हैं, राम जीवन भी हैं और राम चरित्र भी हैं। राम कथा अमृत है। जो व्यक्ति राम कथा का श्रवण करता है, वह जीवन और मृत्यु दोनों के रहस्यों को समझने लगता है।”
रामकथा की महत्ता बताते हुए मुरारी बापू ने कहा कि “कथा शिव के हृदय से शुरू होती है। भगवान शिव स्वयं राम के परम भक्त हैं। रामकथा केवल शब्दों का प्रवाह नहीं, बल्कि हृदय से हृदय तक पहुंचने वाली आध्यात्मिक यात्रा है।”

उन्होंने शब्द की शक्ति का वर्णन करते हुए कहा कि “शब्द की बहुत महिमा होती है। मूल मंत्र राम हैं। राम नाम ही जीवन का आधार है।” प्रेम की अनुभूति पर चर्चा करते हुए बापू ने कहा कि “शब्द से प्रेम प्रकट होता है, स्पर्श से प्रेम प्रकट होता है। रस और गंध (महक) से भी प्रेम प्रकट होता है। प्रेम केवल कहा नहीं जाता, उसे अनुभव भी किया जाता है।”
प्रकृति को ईश्वर का जीवंत संदेश बताते हुए उन्होंने कहा कि “सूरज, चंद्रमा और बहता हुआ जल भी कथा कहते हैं। सृष्टि का प्रत्येक तत्व मनुष्य को जीवन का संदेश दे रहा है। आवश्यकता केवल उसे सुनने और समझने की है।”

संतों के स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए मुरारी बापू ने कहा कि “साधु सबका स्वीकार करता है। उसके लिए कोई अपना-पराया नहीं होता। संत का हृदय प्रेम, करुणा और समभाव से भरा होता है।”
मानव जीवन को ईश्वर का अनुपम उपहार बताते हुए उन्होंने कहा कि “इस मानव जीवन के लिए भगवान का धन्यवाद करना चाहिए। हरि के उपकारों को सदैव स्मरण रखना चाहिए। प्रभु की कृपा के बिना जीवन का कोई मूल्य नहीं है।”
उन्होंने कहा कि रामकथा का उद्देश्य केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर प्रेम, श्रद्धा, संवेदना और आत्मबोध का जागरण करना है। राम नाम और रामकथा व्यक्ति को जीवन के संघर्षों में संतुलन तथा मृत्यु के सत्य को स्वीकार करने की शक्ति प्रदान करती है।
कथा श्रवण के लिए गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, मध्य प्रदेश, बिहार सहित देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु कोच्चि पहुंचे हैं। कथा स्थल पर भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनूठा वातावरण बना हुआ है।

इस दौरान जालान वाराणसी, उत्तर प्रदेश शासन द्वारा मान्यता प्राप्त पत्रकार एवं चंदौली के प्रशांत कुमार, जिला विशेष संवाददाता अशोक कुमार द्विवेदी, सुरेश विश्वकर्मा, उमाशंकर मौर्य, कार्तिकेय पाण्डेय, गुजरात सूरत से आए मल्लिका, ज्योति, बीना, योगी सहित सैकड़ों कथा प्रेमी उपस्थित रहे।


