चकिया- क्षेत्रवासियों की जगी उम्मीद, ठप हुई सेवा जल्द होगी शुरू…..15 दिन से हो गया संचालन बंद, विधायक व भाजपा जिलाध्यक्ष मिले परिवहन मंत्री से…… जल्द मिलेगी नई बसें
लखनऊ में विधायक व भाजपा जिलाध्यक्ष अध्यक्ष ने अवगत कराया मंत्री को समस्या
जल्द मिलेगी नई बसें, फिर से होगा संचालन
वाराणसी।
चकिया रोडवेज स्टेशन पर पिछले एक सप्ताह से एक भी बस का संचालन न होने से यात्रियों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। आलम यह है कि बस अड्डा सुनसान पड़ा है और यात्रियों को बसों के बजाय बाहर खड़े ऑटो और निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि चकिया से वाराणसी के लंका तक चलने वाली बसें बंद होने से बीएचयू जाने वाले छात्र-छात्राओं और मरीजों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है। पहले चकिया से प्रतिदिन पांच रोडवेज बसें लंका के लिए चलती थीं, जो विधायक कैलाश आचार्य की विशेष पहल पर शुरू की गई थीं। लेकिन बीते एक सप्ताह से ये सेवाएं भी पूरी तरह बंद हैं।
यात्रियों का कहना है कि अब उन्हें बीएचयू पहुंचने के लिए पहले मुगलसराय, फिर रामनगर और वहां से लंका की ओर लंबा और थकाऊ सफर करना पड़ रहा है। इससे समय के साथ-साथ आर्थिक बोझ भी बढ़ गया है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शनिवार को क्षेत्रीय विधायक कैलाश आचार्य एवं भाजपा जिलाध्यक्ष काशीनाथ सिंह लखनऊ में उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री दया शंकर सिंह से मुलाकात कर चकिया की परिवहन व्यवस्था पर चर्चा की। विधायक ने मंत्री को अवगत कराया कि “चकिया बस स्टेशन पर इस समय एक भी बस संचालित नहीं हो रही है, जिससे लोगों को मुगलसराय, लंका या नौगढ़ तक आने-जाने में खासी दिक्कत हो रही है।”
विधायक आचार्य ने बताया कि क्षेत्र की जनता के आग्रह पर शुरू की गई बस सेवा का अचानक बंद होना प्रशासनिक उदासीनता का संकेत है। उन्होंने मंत्री से मांग की कि चकिया से पुनः नियमित बस सेवा शीघ्र शुरू की जाए और नई बसें आवंटित की जाएं, ताकि आमजन को राहत मिल सके।
इस पर परिवहन मंत्री दया शंकर सिंह ने आश्वस्त किया कि जल्द ही चकिया डिपो को नई बसें उपलब्ध कराई जाएंगी और बंद सेवाओं को पुनः शुरू किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को भी इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने को कहा है।
स्थानीय नागरिकों ने भी प्रशासन से अपील की है कि बस सेवा जल्द बहाल की जाए ताकि चकिया जैसे पिछड़े क्षेत्र के लोग सुगम परिवहन व्यवस्था से वंचित न रहें। यात्रियों का कहना है कि यह केवल परिवहन का नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़ा बुनियादी मसला है, जिसे प्राथमिकता से देखा जाना चाहिए।