चकिया – ठाकुर बाग में ₹1000 की वसूली पर घमासान, किले के सुरक्षा अधिकारी ने नगर पंचायत पर एफआईआर की मांग उठाई……. मामला पहुंचा समाधान दिवस में एसपी को सौंपा प्रार्थना पत्र……आज भी नाम दर्ज हैं कुंवर का, वसूली को जताया आपत्ति, एसडीएम को सौंपा जांच के लिए
राजस्व अभिलेख में काशी नरेश का नाम दर्ज होने का दावा, एसपी को सौंपे साक्ष्य; जांच के लिए एसडीएम को भेजा गया मामला, ईओ बोले- साफ-सफाई के लिए लिया जाता है शुल्क
चकिया (चंदौली)। नगर के ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व वाले ठाकुर बाग में प्रति आयोजन ₹1000 की वसूली को लेकर विवाद तूल पकड़ता जा रहा है। राजपरिवार की ओर से चकिया किले के विधिक सुरक्षा अधिकारी एवं अधिवक्ता दीपक सिंह राजवीर ने जिला स्तरीय समाधान दिवस में पुलिस अधीक्षक आकाश पटेल को प्रार्थना पत्र, राजस्व अभिलेख और नगर पंचायत द्वारा जारी रसीद सहित अन्य दस्तावेज सौंपते हुए नगर पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने, वसूली पर रोक लगाने और निष्पक्ष जांच की मांग की।
प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि चकिया तहसील के खाता संख्या 463 एवं 465-ब की भूमि वर्तमान राजस्व अभिलेखों में काशी नरेश दुर्ग रामनगर के कुंवर अनंत नारायण सिंह एवं ठाकुर जी मंदिर रामनगर के नाम दर्ज है। इसके बावजूद नगर पंचायत बिना किसी वैधानिक अधिकार के परिसर में हस्तक्षेप कर आमजन से साफ-सफाई एवं व्यवस्थापन के नाम पर ₹1000 की रसीद काट रही है। शिकायत के साथ नगर पंचायत द्वारा जारी रसीद की प्रति भी संलग्न की गई है।
शिकायतकर्ता ने बताया कि वर्ष 2022 में तत्कालीन एसडीएम एवं ज्वाइंट मजिस्ट्रेट प्रेम प्रकाश मीणा के आदेश पर राजपरिवार का नाम राजस्व अभिलेखों से हटाकर भूमि उत्तर प्रदेश सरकार के नाम दर्ज कर दी गई थी। इसी दौरान वर्ष 2024 में नगर पंचायत ने वंदन योजना के तहत ठाकुर बाग में विकास कार्य कराए और इसके बाद शुल्क वसूली शुरू कर दी। बाद में 4 अप्रैल 2025 को तत्कालीन एसडीएम विनय कुमार मिश्रा ने पूर्व आदेश निरस्त कर दिया, जिसके बाद राजस्व अभिलेखों में पुनः कुंवर अनंत नारायण सिंह का नाम दर्ज हो गया। इसके बावजूद नगर पंचायत द्वारा वसूली जारी रखने पर आपत्ति जताई गई है।
प्रार्थना पत्र में यह भी कहा गया है कि नगर पंचायत ने अपनी आख्या में एक राजस्व वाद का उल्लेख कर वसूली को उचित ठहराने का प्रयास किया है, जबकि केवल किसी वाद के लंबित होने से नगर पंचायत को भूमि पर स्वामित्व, प्रबंधन अथवा शुल्क वसूलने का अधिकार नहीं मिल जाता। जब तक सक्षम न्यायालय का कोई आदेश न हो, तब तक राजस्व अभिलेखों में दर्ज स्वामित्व प्रभावी माना जाएगा।
अधिवक्ता दीपक सिंह राजवीर ने मर्जर डीड का हवाला देते हुए कहा कि ठाकुर बाग, मां काली मंदिर और कालीजी पोखरा राजपरिवार की ऐतिहासिक धरोहर हैं। मंदिर की पूजा-अर्चना, पुजारी का मानदेय और अन्य धार्मिक व्यवस्थाओं का खर्च आज भी काशी नरेश परिवार द्वारा वहन किया जाता है। उनका कहना है कि वर्षों से यहां आने वाले श्रद्धालुओं और आमजन से कभी कोई शुल्क नहीं लिया गया। ऐसे में नगर पंचायत द्वारा धनराशि वसूलना अधिकार क्षेत्र से बाहर और अवैध है।





