घोसी विधानसभा क्षेत्र के समाजवादी पार्टी विधायक सुधाकर सिंह का मंगलवार सुबह लखनऊ के मेदांता अस्पताल में निधन हो गया। बीते दिनों वह मुख्तार अंसारी के पुत्र के विवाह समारोह से लौटते समय अचानक अस्वस्थ हो गए थे। वाराणसी एयरपोर्ट पर ही उनकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत गंभीर होने पर चिकित्सकों ने उन्हें लखनऊ रेफर किया, जहां उपचार के दौरान उनका निधन हो गया। वह करीब दस वर्ष से हृदय रोग से पीड़ित थे।
सुधाकर सिंह पिछले विधानसभा उपचुनाव में राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र बने थे, जब उन्होंने प्रदेश सरकार के कद्दावर कैबिनेट मंत्री दारा सिंह चौहान को घोसी सीट पर मात देकर सपा का परचम फहराया था। सदैव जनहित और संघर्षपूर्ण राजनीति के लिए जाने जाने वाले सुधाकर सिंह जिले के प्रभावशाली नेताओं में शुमार थे।
घोसी नगर के समीप ग्राम भावनपुर के मूल निवासी सुधाकर सिंह, स्व. कुलदीप सिंह के चार पुत्रों में तीसरे थे। छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते हुए उन्होंने अपने संघर्ष का आरंभ मात्र 17 वर्ष की आयु में किया था। आपातकाल के दौरान जयप्रकाश नारायण के ‘समग्र क्रांति’ आंदोलन में शामिल होने पर उन्हें जेल भी भेजा गया था।
जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने राजनीतिक यात्रा को नई दिशा दी। भारतीय जनता युवा मोर्चा में जिला महामंत्री रहे। 1977-78 व 1978-79 में सर्वोदय डिग्री कॉलेज, घोसी के अध्यक्ष चुने गए। वर्ष 1996 में वह पहली बार नत्थूपुर (वर्तमान मधुबन) सीट से विधायक बने।
अपने लंबे राजनीतिक जीवन में न उन्होंने दल बदला, न विचार—हालांकि दो अवसरों पर पार्टी से निष्कासन भी झेलना पड़ा। जनहित के मुद्दों पर आंदोलनों, धरना-प्रदर्शनों और संघर्ष के कारण वे कई बार जेल गए। आज भी विभिन्न न्यायालयों में उनसे जुड़े अनेक वाद विचाराधीन हैं।
सुधाकर सिंह के निधन से घोसी व जिले की राजनीति में शोक की लहर दौड़ गई है। स्थानीय जनमानस से लेकर राजनीतिक गलियारे तक हर ओर शोक और श्रद्धांजलि का माहौल व्याप्त है।